
Bihar Elections Mokama Assembly Seat : मोकामा में जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार की राजनीति को हिला दिया है. कभी लालू यादव के करीबी और बाद में अलग-अलग सियासी खेमों में सक्रिय दुलारचंदकी मौत केवल एक अपराध नहीं, बल्कि जातीय और राजनीतिक समीकरणों की नई शुरुआत मानी जा रही है. मोकामा… जो दशकों से बाहुबली राजनीति का गढ़ रहा है अब फिर से जातीय गोलबंदी के भंवर में फंस चुका है और यहां ‘डी’ फैक्टर के रुख पर सबकी निगाहें टिक गई हैं.
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मोकामा विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रही है. प्राय: मीडिया की सुर्खियों में रहते आ रहे ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह दो दशक से इस सीट की राजनीति पर हावी रहे हैं. भूमिहार जाति से आने वाले अनंत सिंह ने यादव जाति के बड़े प्रभाव वाले इस इलाके में अपनी दबंग छवि से वर्चस्व कायम किया, लेकिन दुलारचंद यादव की हत्या ने एकाएक उस संतुलन को हिला दिया है. दरअसल, कभी लालू यादव के बेहद करीबी रहे दुलारचंद यादव का राजनीतिक सफर कई दलों और समीकरणों से गुजरा, लेकिन उनकी हत्या ने इस बार पूरे मोकामा क्षेत्र में जातीय ध्रुवीकरण को फिर से जगा दिया है. इसका परिणाम यह कि मोकामा का चुनाव अब सियासी जमीन पर तीनतरफा तो दिख रहा है, लेकिन अब यह दो ध्रुवीय होता हुआ लग रहा है. मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह (जदयू) बनाम बीना देवी (राजद) बनाम पीयूष प्रियदर्शी (जनसुराज) का संघर्ष सियासी जमीन पर साफ-साफ दिख रहा है. लेकिन, भीतर ही भीतर 1990 के दशक वाली जातीय गोलबंदी जैसी सियासी तस्वीर भी उभरती हुई प्रतीत हो रही है.
दरअसल, बाहुबलियों की आपसी अदावत में जान गंवा चुके दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है. राजनीति के जानकार बताते हैं कि भूमिहार वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में जहां अनंत सिंह की दबंग छवि वर्षों से कायम थी, वहीं अब यादव और धानुक समुदाय के समीकरण इस सत्ता-संतुलन को चुनौती दे रहे हैं. बदले माहौल में यादव समाज का रुझान दोबारा आरजेडी की ओर लौटता हुआ दिख रहा है. जबकि, परंपरागत रूप से नीतीश कुमार का वोट बैंक धानुक समाज अब जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी (धानुक जाति से हैं) के साथ गोलबंद होने की बातें सियासी फिजा में फैल रही हैं. ऐसे में यहीं से मोकामा का सियासी समीकरण भी उलझता हुआ प्रतीत हो रहा है. जानकारों की नजर में मोकामा विधानसभा सीट बाहुबली की ताकत से नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, जातीय गोलबंदी और रणनीतिक चतुराई से तय होगी.
दुलारचंद मौत से एनडीए को झटका, किसका अपर हैंड?
“200 राउंड गोली चलाने वाले को सरकार बचा रही है”… यह कहते हुए तेजस्वी यादव ने भले ही किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान- सीधे अनंत सिंह की ओर इशारा माना गया. जाहिर है जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या ने चुनावी माहौल को अचानक जातीय और भावनात्मक दिशा देने की कोशिश की है. दूसरी ओर, अनंत सिंह ने सूरजभान सिंह को जिम्मेदार ठहराकर यह दिखाने का प्रयास किया है कि दुलारचंद यादव की हत्या का पूरा मामला राजनीतिक षड्यंत्र है. साफ है कि हत्या के बाद से ही माहौल बेहद संवेदनशील है और जमीनी सच्चाई यह भी है कि दुलारचंदयादव की हत्या ने एनडीए खेमे को बड़े नुकसान की आशंका से डरा दिया है.
